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डिंडोरी जिले में पारंपरिक गोंड चित्रकारी को वस्त्रों पर कर आदिवासी महिलाओं को उपलब्ध कराया आजीविका का साधन

डिंडोरी जिले में पारंपरिक गोंड चित्रकारी को वस्त्रों पर कर आदिवासी महिलाओं को उपलब्ध कराया आजीविका का साधन
डिंडोरी जिले में गोंड आदिवासी महिलाएं पारंपरिक रूप से गोंड चित्रकारी करती आ रही हैं, पहले वो इसे अपने घर की दीवारों पर किया जाता था। बाद में कई लोग इसे पेपर एवं कैनवास पर करने लगे। तेजस्विनी कार्यक्रम ने इन महिलाओं की इस कला को वस्त्रों पर लाकर उन्हें आजीविका का एक और ज़रिया उपलब्ध कराने का सफल प्रयास किया है। इसके लिए ग्राम पाटनगढ़ की स्वसहायता समूहों की गोंड महिला कलाकारों को भोपाल स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नॉलॉजी (निफ्ट) में गोंड पेंटिंग कर विभिन्न वस्त्र तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया I प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य था कि गोंड कलाकारों की कलाकौशल का विकास कर इसे आय का जरिया बनाना , गोंड चित्रकारी को जन-जन तक पहुंचाना जिससे ये कला सालों-साल जीवित रह सके और इन कलाकारों को उचित सम्मान व आजीविका मिल सके I प्रशिक्षण के द्वितीय चरण का आयोजन भोपाल के आइकफ आश्रम में राष्ट्रीय फैशन टेक्नॉलॉजी संस्थान (निफ्ट) के तकनीकी सहयोग से किया गया। प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत पाटनगढ़ की ये गोंड महिला कलाकार अब दुपट्टे, स्टोल, साड़ी, कुशन कवर सहित कई तरह के वस्त्र और वस्तुओं पर गोंड चित्रकारी कर रही हैं। भोपाल के जंबूरी मैदान में 17 दिसंबर 2017 को महिला स्व सहायता समूहों के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण एवं सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम अंतर्गत डिंडोरी जिले की आदिवासी महिलाओं द्वारा किए गए पारंपरिक गोंड चित्रकारी वाले अंगवस्त्र से मुख्यमंत्री महोदय द्वारा माननीय उप राष्ट्रपति महोदय का स्वागत किया गया। इनके बनाए उत्पादों के विक्रय हेतु ट्रायफेड से सेंपल मांगे गए थे। ट्राइफेड मध्यप्रदेश के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा इन सेंपल का परीक्षण करते हुए गोरखपुर फेडरेशन को 100 दुपट्टों का आर्डर द्वारा दिया गया है। भारत शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा निर्मित महिला ई हाट वेबपोर्टल से भी इन्हें जोड़ा गया है। साथ ही इनके बनाए उत्पादों को विशेष रूप से हस्तशिल्प उत्पादों का विक्रय करने वाली ऑनलाइन वेबसाइट आई टोकरी पर विक्रय हेतु डाला गया है एवं गाथा व अन्य वेबसाइट्स से भी संपर्क किया जा रहा है। 8 मार्च से 11 मार्च 2018 तक डीबी मॉल भोपाल में आयोजित ग्रामीण महिला हाट बाज़ार में भी गोंड चित्रकारी वाले दुपट्टे, कुशन कवर व अन्य उत्पाद रखे गए, जिन्हें लोगों ने काफी सराहा और इनकी अच्छी बिक्री भी हुई।

डिंडोरी जिले में तेजस्विनी नारी चेतना महिला संघ मेंहदवानी द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों में कोदो-कुटकी पट्टी का वितरण

डिंडोरी जिले में तेजस्विनी नारी चेतना महिला संघ मेंहदवानी द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों में कोदो-कुटकी पट्टी का वितरण
तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम अंतर्गत डिंडोरी जिले के मेहंदवानी ब्लॉक में वर्ष 2012 में "नारी चेतना महिला संघ" का गठन किया गया । फेडरेशन द्वारा विल्पतप्राय स्थानीय कोदो-कुटकी फसल की उन्नत कृषि कर इस फसल को पुनर्जीवित करने का कार्य किया गया है। कोदो-कुटकी कृषि के लिए उल्लेखनीय कार्य करने हेतु समय समय पर फेडरेशन की सराहना की गई है तथा पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं। कोदो-कुटकी पोषक तत्वों का भंडार है, प्रति 100 ग्राम कोदो में कार्बोहाइड्रेट 67 ग्राम, प्रोटीन 7.7 ग्राम, फेट 4.7 ग्राम, आयरन 9.3 ग्राम केल्शियम 10.5 ग्राम एवं मिनरल्स 1.5 ग्राम होते हैं। इसी तरह प्रति 100 ग्राम कुटकी में कार्बोहाइड्रेट 59.2 ग्राम, प्रोटीन 10.6 ग्राम, फेट 4.2 ग्राम, आयरन 5 मिलीग्राम, केल्शियम 27 मिलीग्राम एवं मिनरल्स 4.4 ग्राम होते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश शासन द्वारा मेहंदवानी ब्लाक के 116 ग्रामों की 224 आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों को नाश्ते के रूप में कोदो पट्टी का वितरण करने का निर्णय लिया गया। शासन द्वारा ये कार्य नारी चेतना महिला संघ मेहंदवानी को सौंपा गया है। संघ द्वारा नवंबर 2017 से मेंहदवानी विकासखंड की 46 ग्राम पंचायत स्तर पर 8 सेक्टर तैयार कर 5 हज़ार से अधिक बच्चों को पंचायत के माध्यम से कोदो पट्टी का वितरण समस्त आंगनवाड़ी केंद्रों में किया जा रहा है। प्रति बच्चे के लिए 35 ग्राम प्रतिदिन के मान से कोदो पट्टी तैयार करने हेतु कोदो आटा, सोया आटा, वनस्पति घी, गुड़, भुनी मूंगफली एवं भुने तिल का उपयोग किया जाता है। तेजस्विनी नारी चेतना महिला संघ को कोदो कुटकी से निर्मित पट्टी की आपूर्ति करने से एक निरंतर आय का स्त्रोत उपलब्ध हुआ है। साथ ही आंगनवाड़ी के करीब 5 हजार बच्चों को स्थानीय संसाधनों से निर्मित पौष्टिक आहार भी प्राप्त हो रहा है। कोदो से निर्मित पट्टी को बच्चों में वितरित करने के पूर्व इसका स्थानीय काली लैब प्राइवेट लिमिटेड से गुणवत्ता परीक्षण भी कराया गया है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग के होटलों में भी कोदो-कुटकी से निर्मित व्यंजन शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही फेडरेशन की अध्यक्ष श्रीमती रेखा पंदराम द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा महिलाओं की स्थिति पर गठित आयोग के 61वां सत्र में सहभागिता भी की गई है। न्यूयॉर्क में दिनांक 13 मार्च से 24 मार्च 2017 तक आयोजित हुए इस सत्र में सम्मिलित होने के लिए आइफेड की तरफ से मध्यप्रदेश तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम की एक ग्रामीण आदिवासी महिला को आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम द्वारा डिंडौरी जिले के तेजस्विनी नारी चेतना महिला संघ की अध्यक्ष श्रीमती रेखा पंदराम को नामांकित किया गया। न्यूयॉर्क में श्रीमती रेखा पंदराम ने अपने उद्बोधन में कोदो-कुटकी की उन्नत खेती, जैविक खाद के उपयोग, उचित भंडारण से फसल उत्पादन के बारे में अपने अनुभव बांटे।

वर्मी कम्पोस्ट के कार्य को दिया व्यावसायिक रूप, हाथों-हाथ बिक रही खाद

वर्मी कम्पोस्ट के कार्य को दिया व्यावसायिक रूप, हाथों-हाथ बिक रही खाद
डिंडोरी जिले के तेजस्विनी मेकलसुता महिला संघ गोरखपुर में वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने का कार्य किया जा रहा है। संघ द्वारा वर्मी कम्पोस्ट को वृहद रूप देने के लिए व्यावसायिक कार्ययोजना तैयार की जा रही है। प्रारंभ में संघ द्वारा स्वयं के प्रयास से ग्राम घवाडोंगरी एवं गोपालपुर में पायलट प्रपोजल के रूप में जैविक खाद (वर्मी कम्पोस्ट) के 23 पिट तैयार कर प्रति 03 माह में लगभग 44 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया गया। जैविक खाद निर्माण करने से पहले समूह सदस्यों द्वारा इस कार्य में कोई विशेष रूचि नही थी। किन्तु संघ द्वारा सदस्यों को प्रेरित किया गया जिसके परिणामस्वरूप सदस्यों ने वर्मी कम्पोस्ट तैयार करना प्रारंभ किया। अब संघ द्वारा इस कार्य को व्यापक रूप प्रदान किया जा रहा है। वर्तमान में इन पिट्स से लगभग 44 क्विंटल केंचुआ खाद निकाला जा रहा है। संघ द्वारा इस कार्य को गति प्रदान की जा रही है, जिससे केंचुआ खाद की उत्पादन मात्रा में वृद्धि की जा सके। तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम के सहयोग से तेजस्विनी मेकलसुता महासंघ द्वारा जैविक खाद विक्रय हेतु भोपाल हाट में तेजस्विनी की दुकान में वर्मी कम्पोस्ट के 1 किलोग्राम के पैकेट तैयार कर विक्रय किए गए, जिससे संघ सदस्यों को 4500 रूपये की आय प्राप्त हुयी। वर्तमान में जिले के समस्त संघों में वर्मी शेड निर्माण कार्य किया जा रहा है, जिस हेतु तेजस्विनी मेंकलसुता महिला संघ गोरखपुर के माध्यम से इन संघों को वर्मी कम्पोस्ट उपलब्ध कराया जा रहा है। हाल ही में तेजस्विनी नारी विकास महिला संघ डिण्डौरी द्वारा 7.5 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट एवं रानी अवंती बाई तेजस्विनी महिला संघ शाहपुर द्वारा 3.5 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट उपलब्ध कराया गया जिससे संघ सदस्यों को 22000 रूपये की आय प्राप्त हुई है। तेजस्विनी मेकलसुता महिला संघ द्वारा वर्मी कम्पोस्ट को लेकर व्यापक तौर पर कार्य करते हुये अब इसे व्यवसायिक रूप प्रदान कर रहा है।

डिंडोरी जिले में कस्टम हायरिंग सेंटर से ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा आधुनिक कृषि यंत्रों का लाभ

डिंडोरी जिले में कस्टम हायरिंग सेंटर से ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा आधुनिक कृषि यंत्रों का लाभ
डिंडोरी जिले के करंजिया विकासखंड के ग्राम गोरखपुर में तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम अंतर्गत वर्ष 2013 में मेकलासुत महिला संघ का गठन किया गया। गोरखपुर लोकेशन में तेजस्विनी कार्यक्रम का संचालन विकासखंड की 24 ग्राम पंचायतों के 42 ग्रामों में किया जा रहा है, जहां 42 वीएलसी है। इन ग्रामों में 292 स्व सहायता समूहों का गठन किया गया है, जिनमें 3868 परिवारों से महिला सदस्यों को जोड़ा गया है। तेजस्विनी मेकलासुत महिला संघ की क्रियाशीलता एवं उनके कार्यों को देखते हुए प्रशासन द्वारा कस्टम हायरिंग सेंटर संचालित करने की जिम्मेदारी संघ को सौंपी गई है। 11 अप्रैल 2017 को कलेक्टर श्री अमित तोमर के सहयोग से सहायक आयुक्त सहकारिता को तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम अंतर्गत गठित संघों को कस्टम हायरिंग सेंटर हस्तांतरित करने का आदेश प्राप्त हुए। इसके अंतर्गत 23 मई 2017 को गोरखपुर लोकेशन में तेजस्विनी मेकलासुत महासंघ द्वारा कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना की गई। सेंटर में 6 कृषि यंत्र शामिल है जिनमें 7.25 लाख का ट्रेक्टर, अनाज गहाई के लिए 1.25 लाख का थ्रेशर, बीज बोने के लिए 35 हजार की सीडड्रील, जुताई के लिए 25 हजार का कल्टीवेटर, गहरी जुताई के लिए 18 हजार का प्लाऊ एवं क्यारी बनाने के लिए 35 हजार की हेरो मशीन शामिल है। कस्टम हायरिंग सेंटर से स्व सहायता समूह की महिलाओं को काफी सहायता मिल रही है। इतनी कीमती एवं आधुनिक मशीनों का उपयोग कर एक तरफ जहां उनकी कड़ी मेहनत में कमी आ रही है, वहीं समय की बचत भी हो रही है एवं कृषि में लाभ भी हो रहा है। संघ द्वारा मांग के आधार पर गांव के अन्य हितग्राहियों को यंत्र किराए पर भी दिए जा रहे हैं। कस्टम हायरिंग सेंटर के क्रियान्वयन के लिए ग्राम स्तर पर सीआरपी के द्वारा मांग प्राप्त की जाती है। संघ द्वारा अभी तक 90 हजार का कार्य कराया जा चुका है, जिसमें से 39 हजार का शुद्ध लाभ हुआ है। संघ के इस कार्य से ग्रामीण स्तर पर महिलाओं को आसानी से उक्त महंगे कृषि यंत्र उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने में सहायता प्राप्त हो रही है।

प्रदेश-स्तरीय स्व-सहायता समूह सम्मेलन में डिंडोरी जिले की आदिवासी महिलाओं द्वारा निर्मित गोंड चित्रकारी के अंगवस्त्र से माननीय उप राष्ट्रपति महोदय का स्वागत

प्रदेश-स्तरीय स्व-सहायता समूह सम्मेलन में डिंडोरी जिले की आदिवासी महिलाओं द्वारा निर्मित गोंड चित्रकारी के अंगवस्त्र से माननीय उप राष्ट्रपति महोदय का स्वागत
भोपाल के जंबूरी मैदान में 17 दिसंबर को महिला स्व सहायता समूहों के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण एवं सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में माननीय उप राष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, माननीय मंत्री महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती अर्चना चिटनिस, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री माननीय श्री गोपाल भार्गव सहित कई गणमान्य नागरिक सम्मिलित हुए। इस अवसर पर तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम अंतर्गत डिंडौरी जिले की आदिवासी महिलाओं द्वारा किए गए पारंपरिक गोंड चित्रकारी वाले अंगवस्त्र से मुख्यमंत्री महोदय द्वारा माननीय उप राष्ट्रपति महोदय का स्वागत किया गया। इन वस्त्रों पर तेजस्विनी महिलाओं ने अपने हाथों से पारंपरिक गोंड चित्रकारी की थी, जिन्हें काफी सराहा गया। कार्यक्रम में अपने भाषण में मुख्यमंत्री महोदय ने तेजस्विनी कार्यक्रम अंतर्गत डिंडौरी जिले की कोदो-कुटकी, कोकून की माला की प्रशंसा करने के साथ ही समूह द्वारा बनाये जा रहे विभिन्न उत्पादनों का बड़े ही आकर्षक ढंग से प्रचार कर आम जनता से इन उत्पादनों को उपयोग करने का अनुरोध भी किया गया । सम्मेलन में स्वागत भाषण पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने दिया और आभार प्रदर्शन महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस द्वारा किया गया। सम्मेलन में प्रदेश की लगभग एक लाख महिलायें उपस्थित थी। महिलाओं ने अपने अनुभव भी साझा किये। तेजस्विनी कार्यक्रम की ओर से डिंडोरी जिले की श्रीमती विनीता नामदेव, मंडला जिले से श्रीमती अनारकलीतथाछतरपुर जिले से श्रीमती पार्वती अहिरवार द्वारा अनुभव साझा किये गए।सम्मेलन में समूहों द्वारा बनाई जा रही वस्तुओं की प्रदर्शनी भी लगाई गयी।

तेजस्विनी समूह की महिलाओं द्वारा पंचायतों के सामाजिक अंकेक्षण का कार्य

तेजस्विनी समूह की महिलाओं द्वारा पंचायतों के सामाजिक अंकेक्षण का कार्य
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीमों की लेखा परीक्षा नियम 2011 एवं भारत सरकार की मनरेगा ऑपरेन गाइडलाइन में मनरेगा अंतर्गत किए गए कार्यों की वित्तीय वर्ष में प्रत्येक छह माह में न्यूनतम एक बार सामाजिक लेखा परीक्षा हेतु प्रावधान किया गया है। सामाजिक संपरीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं स्वायत्ता प्राप्त हो, इसके लिए समिति द्वारा कार्य करना निर्धारित किया जाता है। समिति पंचायत एव ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत महात्मा गांधी नरेगा, पंचायतराज एवं सामाजिक न्याय विभाग के अधीन प्रदेश में संचालित कार्यक्रमों की सामाजिक संपरीक्षा करती है। साथ ही मैदानी स्तर पर कार्य कर रहे व्यक्तियों की क्षमता मे वृद्धि कर सामाजिक संपरीक्षा मे प्रभावी भागीदारी भी सुनिश्चित करती है। छतरपुर जिले में तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम द्वारा किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों को देखते हुए जनपद पंचायत बड़ामलहरा की ग्राम पंचायतों में सामाजिक अंकेक्षण कार्य तेजस्विनी स्व सहायता समूह की महिलाओं तथा सी.आर.पी. द्वारा कराए जाने का निर्णय लिया गया। इस कार्य के लिए दो ग्राम पंचायतों के लिए तीन महिला सदस्यों की टीम बनाई गई। चयनित महिलाओं को कार्य पूर्व प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इनके द्वारा मनरेगा अंतर्गत कपिल धारा कूप, सार्वजनिक कूप, इंदिरा आवास, नाडिप टॉका, खेल मैदान, सी.सी.रोड, मुक्तिधाम इत्यादि का अंकेक्षण कार्य किया गया। इस कार्य के अंतर्गत दस्तावेजों का सत्यापन, फील्ड भ्रमण कर मौखिक सत्यापन एवं भौतिक सत्यापन किया गया। दस्तावेजों के सत्यापन में फाइल संधारण, ग्राम सभा का प्रस्ताव, कार्य करने की स्वीकृति, बिल वाउचर, कैश बुक आदि का सत्यापन किया गया। फील्ड भ्रमण कर ग्रामवासियों से बातचीत एवं खुली चर्चा कर मौखिक सत्यापन किया गया तथा अंत में फील्ड भ्रमण के दौरान निर्माण कर कराए गए निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन किया गया। हर ग्राम पंचायत में इस कार्य को 6 दिन में पूर्ण किया गया। कार्य होने के बाद एक दिन विशेष ग्राम सभा का आयोजन कर सामाजिक अंकेक्षण का वाचन कर उसके बारे में जानकारी भी प्रदान की गई।

समर्थ संगिनी बनकर तेजस्विनी महिलाएं करेंगी पुलिस का सहयोग

समर्थ संगिनी बनकर तेजस्विनी महिलाएं करेंगी पुलिस का सहयोग
छतरपुर में तेजस्विनी महिलाएं अब समर्थ संगिनी बनकर पुलिस का सहयोग करेंगी एवं अपने इलाके में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने, उनके निराकरण में सहयोग करने तथा अन्य सहायता करने का कार्य भी करेंगी। बड़ामलहरा विकासखण्ड में तेजस्विनी ग्रामीण महिला संघ बड़ामलहरा द्वारा तेजस्विनी कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। बड़ामलहरा लोकेशन अंतर्गत 32 ग्राम पंचायतों के 44 ग्रामों में तेजस्विनी कार्यक्रम अंतर्गत 300 स्वसहायता समूहों का गठन किया गया है। उक्त समूह सदस्यों को आर्थिक, सामाजिक, मानसिक एवं राजनीतिक रूप से सशक्त करने हेतु निरंतर प्रयास किये जा रहे है। महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय एवं समानता के अंतर्गत़ चैतन्य संस्था राजगुरूनगर पुणे के सहयोग से कानूनी जानकारी का प्रशिक्षण प्राप्त कर परिवार परामर्श केन्द्र का संचालन कर गरीब एवं पीड़ित महिलाओं का सहयोग भी किया जा रहा है। इसी तारतम्य में अप्रेल 2017 में संघ की शौर्या दल एवं स्वसहायता समूह सदस्यों को पुलिस प्रक्रिया जैसे एफ.आई.आर., महिला अधिकार, कानून, महिला हिंसा इत्यादि की बारीकियों को समझने हेतु थाना भ्रमण कराया गया। एस.डी.ओ.पी. श्री प्रमोद कुमार सारस्वत द्वारा महिलाओं को कानून संबंधी जानकारी को विस्तार से समझाया गया। उन्होने बताया कि वो ग्राम स्तर पर महिला सदस्यों के साथ एक ऐसी टीम बनाना चाहते हैं जो ग्राम स्तर पर हो रही महिला हिंसा या किसी भी प्रकार की हिंसा का ग्राम स्तर पर ही आपस में ही समझौता कराकर निराकरण करा दिया जाये। 30 अगस्त 2017 को सागर ज़ोन के आई.जी.पी. सतीश चंद्र सक्सेना ने पुलिस थाना बड़ामलहरा एवं गुलगंज का निरीक्षण किया। इस अवसर पर तेजस्विनी ग्रामीण महिला संघ बड़ामलहरा सदस्यों को थाना परिसर में आमंत्रित किया गया। आई.जी.पी. श्री सतीश चंद्र सक्सेना ने इन महिलाओं से उनके कार्यों की जानकारी ली और अनुभवों को जाना। इसके बाद उन्होने महिलाओं के सामने प्रस्ताव रखा कि वो पुलिस बल के साथ मिलकर एक संगठित समूह के रूप में कार्य करें तथा ऐसा करने पर ये स्पेशल महिला पुलिस समर्थ संगिनी कहलायेगी। आई.जी.पी. द्वारा एस.डी.ओ.पी. बडामलहरा को निर्देशित किया गया कि इन सभी महिलाओं को संबंधित प्रमाणपत्र दिए जाएं एवं इन्हें पुलिस को प्रदत्त सभी अधिकार प्रदान किये जाएं ताकि ये महिलायें पुलिस बल के साथ मिलकर निडर होकर कार्य कर सके। समर्थ संगिनी का गठन का मुख्य उददेश्य महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों की त्वरित सूचना प्राप्त होने पर इन अपराधों पर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित करना तथा इन अपराधों में कमी लाना है। इस हेतु पुलिस महानिदेशक श्री ऋषि कुमार शुक्ला म.प्र. भोपाल द्वारा समस्त पुलिस अधीक्षक मध्यप्रदेश को पत्र जारी किया गया था, एवं बैतूल में सर्वप्रथम इस अभिनव पहल की शुरूआत की गई तथा इसे समर्थ संगिनी नाम दिया गया। समर्थ संगिनी अंतर्गत समर्थ संगिनियों का नेटवर्क तैयार कर उन्हें प्रशिक्षित करना, बीट प्रभारी द्वारा प्रत्येक सप्ताह समर्थ संगिनियों से संवाद स्थापित कर अपराध और अपराधियों के संबंध में जानकारी प्रदान करना, प्रत्येक मीटिंग में प्राप्त जानकारी का रिकार्ड संधारण करना व प्रति थाना प्रभारी / महिला सेल प्रभारी को प्रेषित करना, थाना प्रभारी / महिला सेल प्रभारी द्वारा किसी भी तरह की सूचना मिलने पर तत्काल मौके पर जाकर वैधानिक कार्यवाही करना, आंगनावाड़ियों व स्कूल में दर्ज किशोर बालिकाओं से संवाद कर उन्हें आत्मरक्षा हेतु जूडो कराटे के प्रशिक्षण हेतु खेल एवं युवा कल्याण विभाग से संपर्क स्थापित कर प्रशिक्षण दिलवाना शामिल है। तेजस्विनी ग्रामीण महिला संघ द्वारा समर्थ संगिनी हेतु नामांकित महिलाओं की सूची एस.डी.ओ.पी. कार्यालय थाना बड़ामलहरा को प्रेषित की गई है।

सिलाई सेंटर से आत्मनिर्भरता की राह पर महिलाएं

सिलाई सेंटर से आत्मनिर्भरता की राह पर महिलाएं
पन्ना में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और आजीविका उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बुंदेलखण्ड अजेय तेजस्वी महिला महासंघ अजयगढ़ में सिलाई ट्रेनिंग एवं बुटिक सेन्टर की स्थापना फरवरी 2017 में की गई है। संघ के कार्यकारिणी सदस्यों सहमति एवं सहयोग से यह कार्य किया जा रहा है। इस सेन्टर की सूचना मासिक बैठक एवं कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (सी.आर.पी.) के माध्यम से सभी समूहों तक पहुंचाई गई है। महासंघ द्वारा किए जा रहे अन्य आजीविका गतिविधि कार्य जैसे दुग्ध डेयरी, बकरीपालन, सब्जी उत्पादन, सिलाई कार्य एवं हाट बाजार आदि सम्मिलित हैं। इनमें से सिलाई का कार्य सफलतम रहा है, क्योंकि इस कार्य को करने के लिये प्रत्येक महिला सदस्य काफी उत्साहित है। सिलाई सेन्टर मे उपयोग की जाने वाली आवश्यक सामग्री में चार सिलाई मशीन, कैंची, स्टूल, धागा, रद्दी कागज एवं कपड़े आदि का व्यय महासंघ में एकत्रित समूहों द्वारा दी जाने वाली सदस्यता शुल्क से किया गया है। श्रीमती आरती सोनी ग्राम सिंहपुर में गठित मां दुर्गा तेजस्विनी महिला स्वसहायता समूह की सचिव हैं, जो काफी लम्बे समय से सिलाई कार्य कर रही थी। आय का अन्य साधन न होने के कारण श्रीमती आरती सोनी को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। संघ बैठक मे उपस्थित कार्यकारिणी सदस्य एवं ग्राम स्तरीय समिति के प्रतिनिधियों ने श्रीमती आरती सोनी को 2500 रूपये के मानदेय पर सिलाई सिखाने के लिये मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य करने का दायित्व सौंपा है। सेंटर में सिलाई प्रशिक्षण का कार्य दो शिफ्ट में किया गया, जिसके बाद समूह की 40 सदस्य सिलाई कार्य मे दक्ष हो चुकी हैं। प्रारंभिक पांच माह में महासंघ को सिलाई से 19 हजार रूपये की आय हो चुकी है। अब महिलाएं काफी उत्साह से इस कार्य को कर रही हैं और अपनी आजीविका अर्जन कर रही हैं।

पलायन को मजबूर महिला बनीं अपने गांव की सफल व्यवसायी

     पलायन को मजबूर महिला बनीं अपने गांव की सफल व्यवसायी
मण्डला जिलें के विकासखण्ड मवई के ग्राम मझगाँव में तेजस्विनी सीता स्व सहायता समूह की सुखवती मरावी एक उदाहरण के रूप में सामने आई हैं। समूह में जुड़ने के पहले उनकी आर्थिक स्थिति काफी खराब थी, वो दूसरों के खेतों में मजदूरी करके अपना घर चलाती थीं। कई बार तो आजीविका के लिए उन्हें अपने पति के साथ पलायन करने को भी मजबूर होना पड़ता था। इसका असर बच्चों की परवरिश और उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा था। लेकिन जब सुखवती मरावी तेजस्विनी स्व सहायता समूह से जुड़ीं तो जैसे उन्होने एक नई दुनिया में कदम रखा। समूह से जुड़ने के बाद सुखवती के जीवन में बड़ा परिवर्तन आया उन्होने समूह से ऋण लेकर किराने का दुकान चलाना शुरू की। धीरे-धीरे उनकी दुकान में अच्छी बिक्री होने लगी और आज वो अपनी दुकान से सप्ताह में 4000 से 5000 रूपये की आमदनी कर रही हैं। अब उनकी वार्षिक आय लगभग 48000 से 60000 तक हो गई है। उनके पति भी अब उनके व्यवसाय से जुड़ गए हैं और अब वो गांव में ही रहकर अच्छे से अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।

तेजस्विनी कार्यक्रम ने बदली गांव की तस्वीर

तेजस्विनी कार्यक्रम ने बदली गांव की तस्वीर
छतरपुर जिले में उत्तरप्रदेश की सीमा पर बसे रामटोरिया गांव के हालात पिछले कुछ सालों में तेज़ी से बदले है। यहां की आबादी करीब 3100 है और ज्यादातर लोग पहले अपनी रोजी रोटी के लिए मेहनत मजदूरी पर आश्रित थे। हाल ये था कि कई बार लोगों को परिवार चलाने के लिए पलायन करने पर मजबूर होने पड़ता था। पुरूषों के साथ महिलाएं भी पलायन करने के लिए मजबूर थीं जिससे बच्चों की पढ़ाई लिखाई ठप हो गई थी। तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम अंतर्गत जब गांव में स्वसहायता समूह का गठन किया गया तो महिलाएं धीरे धीरे इससे जुड़ने लगी। महिलाओं को समूह के माध्यम से जागरूक किया गया और आजीविका की गतिविधियों से जोड़ा जाने लगा। आज स्थिति ये है कि गांव की 250 महिलाएं छोटे-छोटे व्यवसाय कर आत्मनिर्भर बन गई हैं। रामटोरिया के पास ही प्रसिद्ध अबार माता मंदिर है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मंदिर परिसर में समूह की महिलाओं ने पूजा सामग्री, मनिहारी की दुकान, फल फूल और सौंदर्य प्रसाधन जैसी दुकानें चला रही हैं। मंदिर परिसर में ही करीब 50 महिलाएं चुनरी, प्रसाद, फूल, खिलौने सहित अन्य दुकानों से अच्छा साखा मुनाफा कमा रही हैं। तेजस्विनी कार्यक्रम के संघमित्र अनिल जैन और आशीष पांडे लगातार इन महिलाओं को प्रेरित कर रहे हैं और नई आजीविका गतिविधियों से जोड़ रहे हैं। गांव की महिलाएं अब सब्जी उत्पादन, दुग्ध उत्पादन, सिलाई सेंटर, किराने की दुकान आदि का व्यवसाय कर अपने परिवार की आजीविका चला रही हैं।

घंटी-दल कर रहा है ऋण वापसी के लिए प्रेरित

घंटी-दल कर रहा है ऋण वापसी के लिए प्रेरित
पन्ना जिले में स्वयंसिद्धा तेजस्विनी महिला संघ सलेहा की महिलाओं द्वारा बैंक ऋण वसूली के लिए “घंटी दल” बनाया गया है। घंटी दल में स्व सहायता समूह की 7 सदस्य शामिल हैं। ये महिलाएं ग्राम पटना तमोली में बैंक से लोन लेने वाले सदस्यों की सूची लेकर उनके घर जाती हैं और घर-घर जाकर घंटी बजाकर उनको शेष बकाया लोन राशि चुकाने के लिए प्रेरित करती हैं। घंटी दल की समझाईश पर लोग अब बैंक आकर सम्पर्क कर रहे हैं और उनके द्वारा शीघ्र ही शेष बकाया लोन चुकाने की बात भी कही जा रही है। कुछ समय पूर्व भारतीय स्टैट बैंक सलेहा के फील्ड ऑफिसर श्री सन्दीप पटेल द्वारा एक बैठक के दौरान बैंक लोन बकाया सेल्हा, कठवरिया, पटनातमोली, नयागांव, मानिकपुर, मडौसा आदि ग्रामों में बकाया सदस्यों की सूची रखी गई थी। उन्होने तेजस्विनी महिलाओं पर विश्वास जताते हुए कहा कि लोन वापसी के लिए वो ग्रामीणों को प्रेरित कर सकती हैं। इसके बाद संघ द्वारा महिलाओं का एक 7 सदस्यीय घंटी दल बनाया गया, जो बकाया लोन वाले घरों में जाकर घंटी बजाकर उन्हें लोन वापसी के लिए प्रेरित कर रहे हैं। भारतीय स्टैट बैंक शाखा सलेहा शाखा प्रबंधक श्री मनोहर माण्डवी द्वारा संघ के इस अनोखे अभियान की सराहना की गई है, वहीं संघ अध्यक्ष श्रीमती कुसुमबाई द्वारा घोषणा की गई है कि घंटी दल में अच्छा कार्य करने वाले सदस्य को पुरस्कृत किया जाएगा।

रेनशेल्टर विधि के उपयोग से सब्जी उत्पादन

रेनशेल्टर विधि के उपयोग से सब्जी उत्पादन
बालाघाट जिले के परसवाड़ा ब्लाक में तेजस्विनी कार्यक्रम अन्तर्गत संचालित महासंघ नारी शक्ति महिला संघ परसवाडा में सब्जी उत्पादन के लिए “रेनशेल्टर” विधि का उपयोग किया जा रहा है। बारिश के मौसम में पोषण युक्त सब्जी उत्पाद एवं आजीविका उन्नयन गतिविधि के तौर पर नवाचार करते हुये इस वर्ष से पत्तेदार सब्जी जैसे हरा धनिया, पालक, मेथी तथा टमाटर, हरी मिर्च के सुरक्षित उत्पादन हेतु रेनशेल्टर विधि का उपयोग कर शेड में इन सब्जियों का उत्पादन कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में प्रयोग के तौर पर 12 गांवों में 25 रेनशेल्टर का निर्माण कर सब्जी उत्पादन की गतिवधि आरंभ की गई है। रेनशेल्टर बनाने में लगभग 2500 से 3000 रूपये तक की लागत आती है, जिसके अंतर्गत बांस की कमचियां, पॉलीमेयर वायर या सुतली तथा प्लास्टिक शीट की आवश्यकता पड़ती है। रेनशेल्टर की चौड़ीई 9 फीट निश्चित की गई है, तथा लंबाई में टमाटर, हरा धनिया, हरी मिर्च व फुलगोभी आदि का रोपण़ किया गया है। इससे अनुमानित आय प्रति रेनशेल्टर 30000 से 50000 तक होने का आंकलन किया गया है।

अंतर्राष्ट्रीय हर्बल मेले में तेजस्विनी महिलाओं ने किया उत्पादों का प्रदर्शन-विक्रय

अंतर्राष्ट्रीय हर्बल मेले में तेजस्विनी महिलाओं ने किया उत्पादों का प्रदर्शन-विक्रय
भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में 14 से 20 दिसम्बर 2017 तक अंतर्राष्ट्रीय हर्बल मेले का आयोजन किया गया। मेले मेंमध्यप्रदेश के साथ बिहार, असम, उत्तराखण्ड, दिल्ली, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों के प्रतिभागियों ने भाग लिया। वन मेले में तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम अंतर्गत तेजस्विनी जिलों से स्व सहायता समूहों की महिलाओं ने भी स्टॉल में अपने उत्पादों को विक्रय हेतु रखा। इनके द्वारा कोदो-कुटकी, रोस्टेड अलसी, सफेद मुसली, महुआ, मुनगा पत्ती, श्री राम चावल, कोकून की माला एवं झालर, कुशन कवर, वर्मी कम्पोस्ट आदि उत्पादों का प्रदर्शन व विक्रयकिया गयाI मेले में इन उत्पादों की अच्छी मांग रही। इस मेले में प्रदेश के विभिन्न जिलों से संग्रहित की गई दुर्लभ जडी-बूटियों के लगभग 300 स्टॉल लगे थे, जहां सुदूर अंचलों की वनोपज समितियों के संग्राहकों ने विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटी एवं वनोषधि का प्रदर्शन एवं विक्रय किया। मेले में हर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया।

समूह से जुड़कर पाया आत्मविश्वास और आर्थिक आत्मनिर्भरता

समूह से जुड़कर पाया आत्मविश्वास और आर्थिक आत्मनिर्भरता
टीकमगढ़ जिले के बम्होरीकलां ग्राम में रहने वाली पुष्पाबाई अहिरवार का परिवार एक समय में रोज़ी रोटी के लिए मोहताज था, किसी तरह मेहनत मजदूर कर ये अपना परिवार चला रहे थे। लेकिन तेजस्विनी कार्यक्रम से जुड़ने के बाद उनकी स्थिति ही बदल गई है। तेजस्वनी स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद पुष्पाबाई ने 20 रूपये प्रति सप्ताह से बचत करना प्रारंभ किया। समूह सदस्य एक दूसरे के साथ अपनी समस्याएं बांटते और उनके निराकरण के लिए चर्चा भी करते रहे। सदस्यों से चर्चा के बाद पुष्पाबाई ने सबसे पहले समूह से 5 हज़ार की राशि का ऋण लिया, इन पैसों से उन्होने कपड़े खरीदे और समूह सदस्यों के बीच ही उनके विक्रय का प्रयास किया। इस काम में सफलता मिलने पर उन्होने कुछ समय बाद फिर समूह से 10 हजार का ऋण लिया और अपने व्यवसाय को बढ़ाया। इसके बाद इन्हें महासंघ से ऋण लेने की जानकारी प्राप्त हुई और पुष्पाबाई ने महासंघ के रिवाल्विंग फंड से 40 हजार की राशि का ऋण लिया। इन पैसों से उन्होने कपड़े खरीदकर स्थानीय बाजार के साथ घर घर जाकर बेचना शुरू किया, साथ ही अपने घर पर ही इन्होने एक दुकान भी खोल ली है। इस व्यवसाय में इन्हें काफी सफलता मिली और आज ये हर महीने 9 हजार से लेकर 14 हजार रूपये तक आय अर्जित कर रही हैं। समूह से ऋण लेकर अब पुष्पाबाई अहिरवार ने एक भैंस भी खरीद ली है, इस प्रकार समूह से जुड़ने के बाद न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति में परिवर्तन आया है बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब इनके बच्चे स्कूल जाते हैं और घर में सभी तरह की सुविधाएं हैं, पुष्पाबाई के पति कमलेश अहिरवार भी इनके काम में सहायता करते हैं और ये परिवार अब एक खुशहाल जीवन जी रहा है।

दुग्ध संग्रहण केंद्र से महिलाओं को हो रहा पहले से अधिक लाभ

दुग्ध संग्रहण केंद्र से महिलाओं को हो रहा पहले से अधिक लाभ
छतरपुर जिले के ग्राम लुगासी की 90 महिलाओं ने रानी लक्ष्मीबाई तेजस्विनी महिला महासंघ महाराजपुर से जुड़कर दुग्ध व्यवसाय से आत्मनिर्भरता की ओर सशक्त कदम बढ़ाया है। पशुधन को लेकर ये गांव पहले से ही समृद्ध रहा है, लेकिन पहले गांव के लोग वेंडर को 20 से 25 रूपये प्रति लीटर के हिसाब से दूध बेचते थे। इसमें भी उन्हें हमेशा तुरंत भुगतान नहीं मिलता था, कई बार आधे-अधूरे पैसे ही मिलते थे। यहां तेजस्विनी कार्यक्रम अंतर्गत दुग्ध संकलन केंद्र खुलने के बाद केंद्र द्वारा ग्राम की महिलाओं को जोड़ने का कार्य किया गया। अब महासंघ से 90 महिलाएं जुड़ चुकी हैं और इन्हें प्रतिदिन प्रति लीटर दूध पर 10 से 15 रूपये का लाभ प्राप्त हो रहा है। इस ग्राम में प्रतिदिन लगभग 2 क्विंटल दूध का उत्पादन होता है, जिससे समिति को भी 5 से 6 हजार रूपये की आय हो रही है। दुग्ध व्यवसाय से हुए लाभ से अब ग्रामीण महिलाएं जर्सी गाय और अन्य उच्च नस्ल के दुधारू पशु खरीदने के लिए आगे आ रही हैं।

ब्यूटी पार्लर बना आय का प्रमुख साधन

ब्यूटी पार्लर बना आय का प्रमुख साधन
पन्ना जिले में रहने वाली रानू चौरसिया भी उन महिलाओं में से एक उदाहरण है, जिन्होने तेजस्विनी कार्यक्रम से जुड़कर अपनी तकदीर और तस्वीर दोनों बदल ली है। स्वयंसिद्धा तेजस्विनी महिला संघ सलेहा द्वारा क्लस्टर पटनातमोली के नयागांव में शिवांगी तेजस्विनी स्व सहायता समूह की सदस्य हैं रानू चौरसिया। समूह की बैठकों में नियमित चर्चा के दौरान एक बार इन्होने ऋण लेकर ब्यूटी पार्लर खोलने की इच्छा जताई। संघमित्रा का सहयोग से इन्हें समूह से 10 हजार का ऋण प्राप्त हुआ जिसके बाद रानू चौरसिया ने छोटा सा ब्यूटी पार्लर खोला। शुरू में इन्हें प्रतिदिन 100 से 200 रूपये की आय होने लगी और धीरे धीरे अब इन्हें रोजाना 300 से 500 रूपये की आमदनी हो रही है। अब ये काम इनके परिवार की आय का प्रमुख साधन बन गया है। रानू चौरसिया अब भी नियमित रूप से समूह की बैठकों में शामिल होती हैं और अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित करती हैं।

तरबूज-खरबूज की सामूहिक खेती

तरबूज-खरबूज की सामूहिक खेती
छतरपुर के लोकेशन बमीठा अन्तर्गत ग्राम बरद्वाहा में 14 तेजस्विनी स्व सहायता समूह गठित हैं, जो नियमित बैठक एवं बचत करने के साथ-साथ आय अर्जित गतिविधियां भी संचालित कर रहे हैं। इन्ही में से एक समूह, श्रीराम तेजस्विनी महिला स्व सहायता समूह को संघमित्र सूक्ष्म वित्त संस्था द्वारा 60 हजार रूपये की राशि ऋण के रूप में दी गई थी। इस राशि से महिलाओं ने किराये की जमीन पर तरबूज-खरबूज की सामूहिक कृषि कर अच्छा लाभ कमाया। श्रीराम तेजस्विनी महिला स्वसहायता समूह द्वारा तरबूज-खरबूज की खेती में कुल लागत 60800 रूपये लगाये गए जिसमें खेती के लिए समूह सदस्यों ने 20 हजार रूपये में 4 एकड़ जमीन चार महीने के लिए किराये से ली, 6 हजार रूपये ट्रेक्टर की जुताई पर खर्च हुए, इसके बाद समूह सदस्यों ने उन्नत किस्म के बीज का क्रय किया जिसमें 18400 रूपये का व्यय हुआ, बीज रोपने के समय मजदूर एवं हल-बैल पर 5 हजार रूपये खर्च किए, 2 हजार रूपये में सिंचाई के लिए किराये पर डीजल पंप तथा 5400 रूपये डीजल पर तथा कीटनाशक दवा पर 4 हजार रूपये का व्यय हुआ। संघमित्र संस्था द्वारा दिए गए ऋण 60000 पर मासिक किस्त 6000 रूपये के अनुसार ऋण वापसी की जानी थी I सभी 12 सदस्यों ने सामूहिक रूप से 500 रूपये प्रति माह एकत्र किए, और चार माह में ऋण राशि वापस कर दी। तरबूज-खरबूज की फसल की देखरेख की जिम्मेदारी समूह की सदस्य रामकुंअर कुशवाहा एवं विमला पाल को दी गई। इन दोनों सदस्यों को कुल आय का 25 प्रतिशत हिस्सा देने तथा शेष 75 प्रतिशत हिस्सा अन्य 12 सदस्यों में समान रूप से वितरित करने का निर्णय लिया गया। फसल के चार माह के मौसम में कुल 1,17,000 रूपये के तरबूज-खरबूज का विक्रय किया गया I कृषि की कुल लागत 60800 रूपये निकालकर 56200 रूपये का शुद्ध लाभ समूह को प्राप्त हुआ I इसमें से देखरेख करने वाली दो सदस्यों को 25 प्रतिशत राशि रूपये 14050 दिए गए एवं शेष 42150 रूपये सभी 12 सदस्यों में 3500 के हिसाब से वितरित किए गएI श्रीराम तेजस्विनी महिला स्वसहायता समूह ने आगामी वर्ष भी इसी तरह के व्यवसाय को और बड़े पैमाने पर करने का निर्णय लिया है।

सात दिन सात घर कार्यक्रम– एक अभिनव पहल

सात दिन सात घर कार्यक्रम– एक अभिनव पहल
डिंडौरी जिले में“सात दिन सात घर” कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। इसके अंतर्गत परिवार को दैनिक आहार की पूर्ति हेतु संतुलित भोजन मिल पाएं एवं भोजन में सभी प्रकार की सब्जियों के नियमित सेवन से सभी विटामिन व खनिज तत्व संतुलित मात्रा में प्राप्त हो सके, ये लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह नवाचार विटामिन और खनिज तत्वों की कमी से होने वाली बीमारियों से बचाने में सहायक सिद्ध हो रहा है। तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम द्वारा जिला डिंडौरी जिले के के समस्त 9 संघों के 259 ग्रामों के 9892 सदस्यों द्वारा दैनिक भोजन में सूक्ष्म पोषक तत्वों की प्रतिपूर्ति हेतु सात दिन सात घर कार्यक्रम को अपनाया गया है।कार्यक्रम अंतर्गत सदस्यों को अपने घर की बाड़ी में 7 क्यारी तैयार कर 7 प्रकार की सब्जियों का उत्पादन कराना प्रारंभ कराया गया। इसमें सदस्यों द्वारा प्रथम दिवस में पहली क्यारी की सब्जी का सेवन व द्वितीय दिवस में द्वितीय क्यारी की सब्जी का सेवन, इस प्रकार सात दिन सात प्रकार की सब्जी का सेवन किया जाता है। सात दिन के पश्चात पुनः सदस्यों द्वारा प्रथम दिवस में प्रथम क्यारी से शुरूआत की जाती है। ये कार्यक्रम सूक्ष्म पोषक तत्वों व खनिज तत्वों की कमी को दूर करने में तेजस्विनी परिवारों का एक अभिनव प्रयास है, जिसे अपनाने के बाद से महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा ’’सात दिन सात घर’’ कार्यक्रम को पूरे जिले में प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही प्रशासन द्वारा इस कार्यक्रम की सराहना करते हुये महिला बाल विकास विभाग से जिले के समस्त ग्रामों में इस अभियान को घर घर तक पहुंचाने की बात भी कही गई है।

तिरंगा थाली– पूर्ण पोषण प्राप्त करने हेतु कार्यक्रम

तिरंगा थाली– पूर्ण पोषण प्राप्त करने हेतु कार्यक्रम
डिंडौरी जिले में “तिरंगा थाली” नवाचार का प्रारंभ किया गया है, तिरंगा थाली से आशय दैनिक भोजन में तीन रंगों का समावेश करने से है। इसमें प्रथम रंग केसरिया है जिसके अंतर्गत सभी प्रकार की दालों का समावेश है। द्वितीय रंग सफेद है जिसके अंतर्गत चावल व रोटी है है तथा तृतीय रंग हरा है जिसके अंतर्गत समस्त प्रकार की हरी सब्जियों को शामिल किया गया है। इस प्रकार तिरंगा थाली अर्थात दाल, चावल व रोटी तथा सब्जियों के समावेश से जो भोजन ग्रहण किया जाएगा उसमें प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व प्राप्त होते हैं।तिरंगा थाली ग्रहण करने के पीछे यही उद्देश्य है कि दोनों समय के भोजन में परिवारजनों को सभी प्रकार के पोषक तत्वप्रोटीन,कार्बोहाईड्रेट, खनिज तत्व एवं विटामिन प्राप्त हों, जिससे वे स्वस्थ रहे और उन्हें पर्याप्त ऊर्जा प्राप्त हो। तेजस्विनी कार्यक्रम अंतर्गत संघों के माध्यम से तिरंगा थाली के उपयोग हेतु ग्राम के समूह सदस्यों को वीएलसी की बैठक के माध्यम से जागरूक किया गया है। इसके लिए परिवारों के द्वारा अपने बाड़ी व खेत में सात दिन सात घर के माध्यम से तीन रंगो का समावेश कर उत्पादन कार्य कराया जा रहा है। तेजस्विनी कार्यक्रम द्वारा इस प्रकार की पहल जिले से कुपोषण मुक्त करने के लिए वरदान साबित हो रही है। इस अभिनव प्रयास को देखकर जिला प्रशासन द्वारा तेजस्विनी परिवारों के द्वारा उपयोग में लाये जा रहे ’’तिरंगा थाली ’’कार्यक्रम को पूरे जिले में प्रारंभ किया गया हैं I

मचान बनाकर उन्नत कृषि

मचान बनाकर उन्नत कृषि
बालाघाट जिले के मदनपुर गांव में रहने वाली सरवन्ती तेकाम की आर्थिक स्थिति 2009 में परसवाड़ा नारी भक्ति तेजस्विनी महिला संघ से जुड़ने से पूर्व बेहद खराब थी। लेकिन समूह से जुड़ने के बाद सरवन्ती बाई ने न सिर्फ बचत प्रारंभ की, बल्कि आजीविका का एक और साधन भी खोज लिया। उन्होने मचान बनाकर जैविक खेती शुरू की। सात फीट लंबे 52 खंभों को बांधकर मचान बनाया और इसके नीचे एक फीट गहरा गड्ढा एक फीट चौड़ा गड्ढा खोदकर बेल वाली फसल लगाई। हर गड्ढे में वर्मी कम्पोज़्ड खाद और गोबर खाद डाली, इसके बाद टाइकोडर्मा से उपचारित कर एक दो बीज डाले। समय समय पर इनकी निदाई-गुड़ाई कर नीमकांठा, गौमूत्र, अग्निअस्त्र डाला। साथ ही हर 15 दिन में मटका खाद, जैविक खाद और जीवामृत भी डाला। कुछ समय बाद बेल बढ़ने पर मचान पर चढ़ा दी। मचान पर बेल अच्छे से फैल जाती है और फल तोड़ने में आसानी रहती है, इस प्रकार करीब पांच डेसीमल जमीन खेती में सेम, बरबटी, लौकी, करेला, गिलकी आदि फसल लगाकर सरवन्ती तेकाम एक सीजन में आठ से दस हजार रूपये कमा रही हैं।

कोकून की माला और झालर का व्यवसाय

कोकून की माला और झालर का व्यवसाय
मंडला के कजरवाड़ा गांव में नारीशक्ति स्वसहायता समूह एवं श्रीगणेश स्व सहायता समूह द्वारा महिलाओं को कोकून की माला एवं झालर बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके पश्चात दोनों समूहों की महिलाओं ने स्थानीय स्तर पर मेले आदि में माला और झालर बेचने का निर्णय लिया। महिलाओं ने दीप मेला मंडला, उत्सव मेला भोपाल तथा होटल क्लब महिन्द्रा से संपर्क कर माला बेचने की बात की। सभी जगहों पर इन्होने 60 रूपये, 80 रूपये तथा 100 रूपये की दर से अलग अलग तरह की माला व झालर बनाकर इनका विक्रय किया। अब तक ये महिलाएं कोकून मालाओं के व्यवसाय से करीब 12 हजार रूपये का मुनाफा कमा चुकी हैं।

गांव में फैला उजियारा

गांव में फैला उजियारा
बालाघाट जिले के सालेटेकरी लांजी रोड पर मछुरदा ग्राम पंचायत पहले काले पानी के रूप में कुख्यात थी। किसी कर्मचारी को अगर सजा देनी होती थी तो उसका तबादला इस ग्राम पंचायत में कर दिया जाता था, क्योंकि यहां पानी की समस्या के साथ ही बिजली की भी समस्या थी। यहां मुख्य रूप से बैगा और गोड़ जनजाति की बसाहट है जो काफी मेहनती है लेकिन समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए काफी प्रयास किए जाने बाकि थे। यहां तेजस्विनी कार्यक्रम लागू होने के बाद से स्थानीय लोगों को काफी लाभ हुआ है। मछुरदा गांव की रहने वाली संगीता वाहने महिला मोबलाइज़र हैं, शुरू शुरू में इन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यहां गांवों की दूरी बहुत अधिक है, बीच में जंगल पड़ते हैं जहां जानवरों का भय रहता है। बावजूद इसके संगीता वाहने ने महिलाओं को आपस में जोड़ा और बचत तथा आजीविका के अन्य साधनों के बारे में जानकारी दी। ग्रामीणों को शासकीय योजना के अंतर्गत खाद्य वितरण प्रणाली के अंतर्गत अन्त्योदय कार्ड तो मिला था लेकिन जब ये राशन लेने जाते हैं तो इन्हें काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता। ग्राम स्तरीय बैठक में लोगों ने अपनी कई परेशानियां रखी, जिसके बाद ग्रामीणों ने कलेक्टर से मिलने का निर्णय लिया। कलेक्टर के सामने इन्होने अपनी परेशानियां रखी और आवेदन सौंपा। जिसके बाद अधिकारियों ने इनके इलाके में सौर ऊर्जा से सभी घरों में विद्युत व्यवस्था कर दी। आज गांव में इन सबके घर बिजली से जगमगा रहे हैं।

गांव में खुला हाट बाज़ार

गांव में खुला हाट बाज़ार
छतरपुर जिले के सलैया गांव में और आसपास कोई हाट बाजार नहीं था, इस कारण ग्रामीणों को सामान खरीदने करीब 10 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। इस कारण जहां आने जाने के लिए 20 रूपये किराए में खर्च हो जाते, वहीं इनका काफी समय भी बर्बाद होता। यहां गठित बमीठा लक्ष्मीबाई दर्शना तेजस्विनी स्व सहायता समूह की महिलाओं ने ग्राम स्तरीय बैठक में इस बात को उठाया। चर्चा में सप्ताह में दो दिन गांव में हाट बाजार लगाने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। प्रस्ताव पर पंचायत सचिव ने सभी के हस्ताक्षर करवाए और इसे जनपद पंचायत को अनुमोदन के लिए भेजा गया। अनुमोदन मिलने पर तेजस्विनी परियोजना एवं ग्राम पंचायत सलैया के संयुक्त प्रयास से 12 जनवरी 2016 से सलैया गांव में हाट बाजार लगना प्रारंभ हो गया है। गांव में ही हाट बाजार लगने से जहां लोगों को सुविधा हुई है, वहीं समूह के सदस्यों सहित गांव के अन्य लोगों को रोजगार भी मिला है।

मनिहारी दुकान बनी आजीविक का जरिया

मनिहारी दुकान बनी आजीविक का जरिया
पन्ना जिले के पड़रियाकलां गांव में रहने वाली मालती लखेरा की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी। मालती, ज्ञान एकता तेजस्विनी महिला स्व सहायता समूह की सदस्या थी और उन्होने समूह से एक हजार रूपये का लोन लिया। इस राशि से उन्होने मनिहारी दुकान खोली और एक माह में ही उन्हें इतनी आमदनी हो गई कि उन्होने ऋण वापस भी कर दिया। अगली बैठक में मालती ने फिर 5 हजार का ऋण लिया और दुकान बढ़ाने के साथ सिलाई मशीन भी खरीद ली। अब मालती प्रतिदिन 150 से 250 रूपये तक अर्जित कर लेती हैं। काम में उनके पति भी सहयोग करते हैं और अब नियमित आय होने से परिवार की आर्थिक स्थिति काफी सुधर गई है।

आलू की खेती से मुनाफा

आलू की खेती से मुनाफा
बालाघाट जिले के कटंगा गांव में 80 प्रतिशत महिलाएं साग-सब्जी के उत्पादन से जुड़ी हैं। कुछ महिलाएं गन्ने की खेती भी करती है, और गुड़ का उत्पादन कर बाजार में बेचती हैं। वनांचल सखी तेजस्विनी महासंघ द्वारा गांव में आजीविका के विकल्पों पर प्रशिक्षण देने के बाद 14 महिलाओं ने आलू की खेती करने का निर्णय लिया। इसके बाद संघ ने उद्यानिकी विभाग से इन महिलाओं को तकनीकी सहयोग व प्रशिक्षण दिलवाया। महिलाओं ने गांव में पानी की उपलब्धता वाली जमीन ठेके पर ली और 200 रूपये में डेढ़ क्विंटल आलू के बीज खरीदकर उसे 8 दिन अंकुरित करने के लिए छोड़ दिया। जमीन को ट्रेक्टर से जोता गया और आठ दस दिन बाद क्यारियां बनाकर उनमें अंकुरित आलू की बुवाई कर दी गई। 15 दिन तक सिंचाई के बाद इनके पौधे बढ़ गए, और करीब 2 महीने में आलू की फसल तैयार हो गई। सभी महिलाओं ने मिलकर खुदाई कर आलू निकाले। इन्होने करीब 7 क्विंटल आलू उगाए, जिसे सभी महिलाओं ने आपस में बराबर बांट लिया। महिलाओं ने अपने घर में साल भर के लिए आलू रखने के बाद बचे हुए आलूओं को 10 रूपये किलो की दर से गांव में बेच दिया, जिससे इन्हें अच्छा मुनाफा हुआ।

किराने की दुकान से आजीविका अर्जन

किराने की दुकान से आजीविका अर्जन
पन्ना जिले के गभौरा गांव में रहने वाली शांतिबाई का परिवार बेहद गरीब था। पूजा तेजस्विनी महिला स्वसहायता समूह से जुड़ने से पहले शांतिबाई और उनके पति मजदूरी कर जीवन चलाते थे। आर्थिक अभाव के कारण इनके बच्चे स्कूल भी नहीं जाते थे। समूह से जुड़ने के बाद शांतिबाई ने समूह की बचत से ऋण लिया और अपने घर में छोटी सी किराने की दुकान खोली, जहां वो रोजमर्रा की वस्तुओं के साथ पान भी बेचने लगी। इस दुकान से स्थिति थोड़ी सुधरी तो शांतिबाई ने संघमित्रा से 16 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर के हिसाब से 10 हजार रूपये का लोन लिया। अब वो गांव के नजदीकी हाट बाजार से दुकान के लिए सामान खरीदकर लाती हैं, वे दुकान में दैनिक उपयोग की वस्तुएं, कोल्डड्रिंक्स, चाय तथा पान का विक्रय करती हैं। दुकान खुलने के बाद इनकी आमदनी प्रतिमाह 5 हजार से 6 हजार तक हो गई है। इन्होने संघमित्रा से लिया ऋण भी चुका दिया है तथा अगले ऋण के लिए आवेदन किया है। अब शांतिबाई का मध्यांचल ग्रामीण बैंक में स्वयं का बचत खाता भी है। इनके बच्चे अब स्कूल जाते हैं और इन्होने स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत अपने घर में शौचालय बनाने के लिए आवेदन भी किया है।

मुर्गीपालन से आर्थिक स्थिति में परिवर्तन

मुर्गीपालन से आर्थिक स्थिति में परिवर्तन
सफलता की यह कहानी पन्ना जिले के जिगनी बल्दूपुरवा गांव की की है I ये एक महिला किसान हैं और एकता तेजस्विनी महिला स्व सहायता समूह की सदस्या हैं। समूह से जुड़ने से पूर्व इनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। समूह से जुड़ने के बाद इन्होने कुछ और आजीविका करने के बारे में सोचा और समूह के सामने इस बात को रखा। इसके बाद समूह की सहायता से सुशीला लोध ने संघमित्रा फायनेंस से 50 हजार का ऋण लिया। अपनी बचत से 25 हजार और मिलाकर इन्होने कुल 75 हजार राशि से बड़े स्तर पर मुर्गीपालन का कार्य शुरू किया। इन्होने 25 हजार रूपये से शेड बनवाया, 50 हजार से 500 चूजे, दवा, दाना, डिब्बे आदि में व्यय किए। पहली बार 35 चूजे मर गए किन्तु फिर भी सुशीला लोधी को इस व्यवसाय में 5 हजार रूपये का लाभ हुआ। इसके बाद इन्होने दोबारा 500 चूजे खरीदे, दूसरी बार इन्हें एक महीने करीब 9 हजार रूपये का लाभ हुआ। वर्तमान में सुशीला लोधी के पास 900 चूजे हैंI इन्होने मुर्गियों की संख्या को देखते हुए एक और नया शेड बना लिया है और अब ये दोगुने लाभ की उम्मीद कर रही हैं। संघमित्रा संस्था से लिया हुआ ऋण भी ये लौटाती जा रही हैं I

भैंसपालन से बदली घर की तस्वीर

भैंसपालन से बदली घर की तस्वीर
पन्ना जिले के निजामपुर गांव में रहने वाली खेमरानी किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। ये खेती में अपने पति का हाथ बंटाती हैं, इनके पास करीब 2 एकड़ सिंचित जमीन है जिसमें आधुनिक तकनीक से खेती कर इन्हें साल भर में करीब 30 हजार की आय हो जाती थी। ज्ञानदेवी तेजस्विनी महिला स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद खेमरानी ने अपनी आय बढ़ाने के बारे में सोचा। उन्होने समूह से ऋण लेकर भैंस पालन करने की इच्छा जताई। समूह की कुल बचत 19199 रूपये है I फेडरेशन के सहयोग से समूह सदस्यों को संघमित्रा फायनेंस द्वारा 40 हजार रूपये का ऋण प्रदाय किया गया। 20 हजार रूपये खेमरानी तथा 20 हजार अन्य सदस्यों को 16 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर ऋण दिया गया। खेमरानी ने 20 हजार ऋण राशि तथा 15 हजार रूपये अपनी बचत से मिलाकर 35 हजार की भैंस खरीदी। खेमरानी और उनके पति को कार्यक्रम के अंतर्गत पशुपालन विभाग की ओर से प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। इनकी भैंस एक दिन में 6 से 8 लीटर दूध देती है, जिसे खेमरानी 30 रूपये प्रति लीटर की दर से विक्रय कर देती हैं। इसके अलावा घी बनाकर 500 रूपये प्रति किलो के हिसाब से बेचने पर उनकी आमदनी में और इज़ाफा हुआ है। पहले जहां खेमरानी के परिवार की वार्षिक आय 30 हजार रूपये थी, वहीँ अब बढ़कर करीब 52 हजार रूपये हो गई है, जिससे उन्होने एक और भैंस खरीद ली है जिससे इनकी आय में और बढ़त हो रही है। अब खेमरानी का बैंक में स्वयं का बचत खाता है और वो अपने घर में शौचालय निर्माण भी कराने वाली हैं।